Land Registry Documents: भारत में संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी और कानूनी उलझनों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने पंजीकरण प्रणाली में बड़ा सुधार किया है. अब जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और डिजिटल हो गई है. इन नए नियमों का उद्देश्य नकली दस्तावेजों को रोकना, सही पहचान सुनिश्चित करना और सभी लेन-देन को विश्वसनीय बनाना है. यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो संपत्ति में निवेश करना चाहते हैं लेकिन धोखाधड़ी के डर से पीछे हट जाते थे
प्रॉपर्टी फ्रॉड: लगातार बढ़ती चिंता का विषय
बीते कुछ वर्षों में भारत के अलग-अलग राज्यों में जमीन से जुड़े फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं.
- एक ही जमीन को कई लोगों को बेचना
- नकली रजिस्ट्री कराना
- फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल करना
- पुराने विवादित कागजों से रजिस्ट्रेशन कराना
सरकार ने अब इन सभी समस्याओं पर रोक लगाने के लिए कड़े डिजिटल सत्यापन और पहचान प्रक्रियाएं अनिवार्य कर दी हैं.
पैन कार्ड अब अनिवार्य, पहचान में नहीं रहेगी चूक
नई व्यवस्था के तहत संपत्ति खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों को पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही,
- पासपोर्ट साइज फोटो भी आवेदन पत्र में जरूरी होगी
- पहचान में कोई भ्रम या गलती न रहे, इसलिए यह कदम उठाया गया है
*फर्जी नाम या अज्ञात व्यक्ति द्वारा संपत्ति पंजीकरण अब लगभग असंभव हो गया है.
आधार आधारित प्रमाणीकरण से हुई पुष्टि पुख्ता
आधार कार्ड को भूमि पंजीकरण प्रक्रिया का मुख्य स्तंभ बना दिया गया है. इससे न केवल व्यक्ति की पहचान की पुष्टि होगी, बल्कि उसके बायोमेट्रिक डिटेल्स की जांच भी की जा सकेगी.
अब रजिस्ट्री के समय अनिवार्य होंगे:
- आधार कार्ड
- खसरा संख्या, खतौनी, और अन्य भू-अभिलेख
- सभी कागजात का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा, जिससे पुराने या विवादित दस्तावेज तुरंत पकड़े जा सकेंगे
बिना टैक्स चुकाए नहीं होगी रजिस्ट्री
नई नीति के अनुसार, अगर किसी संपत्ति पर नगर निगम टैक्स या कोई अन्य शुल्क बकाया है, तो पहले उसका भुगतान करना जरूरी होगा.
- खरीदार को सुनिश्चित करना होगा कि विक्रेता ने सभी कर चुका दिए हैं
- बकाया राशि चुकाने के बिना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी
इससे खरीदार भविष्य में किसी भी प्रकार की कर संबंधी परेशानी से बच पाएगा.
पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल, समय और मेहनत दोनों की बचत
सरकार ने पंजीकरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
अब अधिकांश राज्यों में
- दस्तावेज़ अपलोड करना
- शुल्क भुगतान करना
- फाइनल रजिस्ट्रेशन कराना
सब कुछ ऑनलाइन संभव हो गया है.
इससे
- लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते
- बिचौलियों की भूमिका कम हो गई है
- भूमि रिकॉर्ड कुछ ही मिनटों में देखा जा सकता है
फ्रॉड पर अब डिजिटल नजर, हर भूखंड की स्थिति मिलेगी तुरंत डिजिटल रिकॉर्ड से यह जांचना आसान हो गया है कि कोई भूमि विवादित है या नहीं.
- क्या उस पर कोई ऋण या बंधक दर्ज है?
- क्या पहले से किसी अन्य के नाम है?
- क्या पहले वह किसी और को बेची गई है?
इन सभी बातों की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध होगी, जिससे संपत्ति खरीदने वाले को पूर्ण पारदर्शिता मिलेगी.
राज्यवार नियमों में हो सकती है थोड़ी भिन्नता
हालांकि केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन भूमि पंजीकरण राज्यों का विषय है. इसलिए कुछ राज्यों में इन नियमों के अनुपालन में
- थोड़े बदलाव हो सकते हैं
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नियमों में लचीलापन रहेगा
*इसलिए नागरिकों को सलाह दी जाती है कि रजिस्ट्री से पहले अपने राज्य की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट नियम जरूर देखें.
नई व्यवस्था से खरीदार-विक्रेता दोनों को सुरक्षा
इन नए नियमों से न केवल धोखाधड़ी रुकेगी बल्कि रजिस्ट्री प्रक्रिया पारदर्शी और विवादमुक्त होगी.
- खरीदार आश्वस्त रहेगा कि उसे असली और वैध जमीन मिल रही है
- विक्रेता को सरल और साफ प्रक्रिया का लाभ मिलेगा
यदि सही दस्तावेज उपलब्ध हैं और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए, तो संपत्ति का लेन-देन अब पहले से कहीं ज्यादा आसान, सुरक्षित और तेज हो गया है.






