सरसों के भाव में आई जबरदस्त बढ़ोतरी, मंडियों में ये है प्रति क्विंटल रेट Mustured Price Hike

Mustured Price Hike: साल 2026 की शुरुआत सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आई है. लंबे समय से दबाव में चल रही सरसों की कीमतें अब फिर से रफ्तार पकड़ती दिख रही हैं. देश की प्रमुख ...

Ravi Yadav

Mustured Price Hike: साल 2026 की शुरुआत सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आई है. लंबे समय से दबाव में चल रही सरसों की कीमतें अब फिर से रफ्तार पकड़ती दिख रही हैं. देश की प्रमुख मंडियों में सरसों के भाव में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है, जिससे किसानों के चेहरे पर संतोष की लहर दौड़ गई है.

क्यों बढ़ रही है सरसों की कीमत?

सरसों के भाव में तेजी के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं:

  • घरेलू बाजार में बढ़ती मांग: खाद्य तेल की खपत में बढ़ोतरी के कारण तेल मिलें अधिक सरसों की खरीद कर रही हैं.
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर: वैश्विक खाद्य तेल बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से घरेलू कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है.
  • मौसम की अनिश्चितता: प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में असमय बारिश और पाले की आशंका के चलते उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है.

इन सब कारणों से सरसों की कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है.

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मंडियों में ताजा भाव क्या हैं?

देश की बड़ी कृषि मंडियों में सरसों के दाम में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है.

  • सामान्य क्वालिटी की सरसों: ₹6,500 से ₹7,800 प्रति क्विंटल तक बिक रही है.
  • बेहतर क्वालिटी की सरसों: इससे भी ऊंचे दाम पर बिक रही है.
  • राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा की मंडियों में तेजी का असर अधिक नजर आ रहा है.

यहां पर किसान अपनी उपज रोक कर रख रहे हैं, जिससे मंडियों में आवक घट गई है और मांग मजबूत बनी हुई है.

किसान क्यों रोक रहे हैं सरसों की बिक्री?

पिछले कुछ महीनों तक दाम गिरने से परेशान किसानों ने अब जल्दबाजी में फसल बेचने से परहेज करना शुरू कर दिया है. जिनके पास भंडारण की सुविधा है, वे बेहतर कीमत के इंतजार में अपनी उपज रोककर बैठे हैं.

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  • किसानों को भरोसा है कि भाव और ऊपर जा सकते हैं.
  • कुछ किसान आंशिक बिक्री करके नकदी की जरूरत भी पूरी कर रहे हैं और फायदे की उम्मीद भी बनाए रखे हुए हैं.

क्या सरसों ₹10,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है?

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी अभी शुरुआती चरण में है.

  • यदि सरसों की आवक सीमित रही और तेल मिलों की मांग बनी रही, तो भाव और बढ़ सकते हैं.
  • आगामी शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में खाद्य तेल की मांग बढ़ती है, जिससे सरसों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है.
  • यदि सरकार आयात पर नियंत्रण लगाती है, या वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है, तो घरेलू मांग और तेज हो सकती है.

इन सभी कारकों को देखते हुए विशेषज्ञ ₹10,000 प्रति क्विंटल तक के दाम की संभावना जता रहे हैं.

किसानों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि किसानों को:

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  • पूरी फसल रोकना जोखिम भरा हो सकता है,
  • इसलिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बिक्री करना बेहतर विकल्प हो सकता है,
  • जिससे कैश फ्लो बना रहे और मुनाफा भी संभावित रूप से मिल सके.

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