Sone Ka Bhav: दुनिया में जारी राजनीतिक और आर्थिक तनाव अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और बाजार में अस्थिरता के चलते लोग सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हुए तेजी से खरीदारी कर रहे हैं. इसी वजह से भारत में चांदी पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई है, जबकि सोना भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर कारोबार करता दिख रहा है.
घरेलू बाजार में रिकॉर्ड तोड़ भाव
सोमवार को घरेलू बाजार में चांदी ₹3,10,151 प्रति किलो पर बंद हुई, वहीं सोना भी ₹1,47,757 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया. MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर यह उछाल दिखा, जिसने सोना-चांदी को आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया है.
सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की दरें
24 कैरेट सोना ₹1,46,250,
22 कैरेट सोना ₹1,34,060,
और 18 कैरेट सोना ₹1,09,690 प्रति 10 ग्राम हो गया है. वहीं, चांदी की कीमत ₹3,05,100 प्रति किलो दर्ज की गई है, जिससे सोने-चांदी की खरीदारी अब बेहद महंगी हो गई है.
ग्लोबल मार्केट में भी कीमती धातुओं की चमक
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) पर भी तेजी बनी हुई है. सोना $4,669.40 प्रति औंस और चांदी $93.40 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है. इससे पहले सोमवार को चांदी $94.065 प्रति औंस और सोना $4,672.50 प्रति औंस तक पहुंच चुका था.
कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह: वैश्विक तनाव
कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में यह उछाल वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक फैसले, यूरोप-अमेरिका के बीच विवाद, और चांदी की आपूर्ति में कमी के चलते आया है. लोग निवेश के लिए सेफ हेवन एसेट्स (जैसे सोना-चांदी) की ओर रुख कर रहे हैं.
औद्योगिक मांग और कम आपूर्ति ने चढ़ाई चांदी
Geojit Investments के हरीश वी के अनुसार, वैश्विक और घरेलू स्तर पर चांदी की मांग बढ़ने और आपूर्ति घटने से भारत में कीमतें ₹3 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीक वाले उपकरणों में चांदी का उपयोग होने के कारण इसकी औद्योगिक मांग लगातार तेज हो रही है
2026 तक बनी रह सकती है आपूर्ति की समस्या
हरीश का कहना है कि चांदी के उत्पादन में कमी, खदानों से कम आउटपुट, और रीसाइक्लिंग में गिरावट जैसे कारणों से यह आपूर्ति संकट 2026 तक बना रह सकता है. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है
निवेशकों के लिए चांदी बनी सेफ हेवन
भू-राजनीतिक अनिश्चितता, मुद्रा में उतार-चढ़ाव, और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच चांदी को सुरक्षित निवेश (Safe Investment Asset) माना जा रहा है. यही कारण है कि Silver ETFs में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है
घरेलू कारकों ने भी चढ़ाई कीमतें
भारत में शादी और त्योहारों का मौसम, रुपये में कमजोरी, और घरेलू मांग की मजबूती ने भी चांदी की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. आयात महंगा होने से भी इसका असर देखा गया है.
अमेरिका-यूरोप विवाद और ग्रीनलैंड मामला
अमेरिकी राष्ट्रपति की ग्रीनलैंड की खरीद को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण यूरोपीय देशों के आयात पर टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होकर जून 2026 तक 25% तक पहुंच सकता है. इससे निवेशकों ने सुरक्षित एसेट्स में भरोसा जताया है, जिससे कीमतें और बढ़ीं.
जानिए क्या कहते हैं कमोडिटी विशेषज्ञ
एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी कहते हैं, चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी कई स्ट्रक्चरल और मैक्रोइकोनॉमिक कारणों से हुई है. जब ₹1,00,000 का स्तर पार हुआ, तब से फिजिकल डिमांड में उछाल आया. ईवी, सोलर, क्लीन एनर्जी की मांग ने चांदी को नई उड़ान दी है.
डॉलर की कमजोरी और बुलियन का बढ़ता आकर्षण
डॉलर इंडेक्स में गिरावट और फिएट मुद्राओं के विकल्प के तौर पर बुलियन (सोना-चांदी) में निवेश ने भी बाजार में तेजी लाई है. निवेशकों का झुकाव तेजी से बुलियन की ओर बढ़ा है.
जनवरी 2026 तक चांदी ने दिया 30% रिटर्न
चॉइस ब्रोकिंग के आमिर मकदा बताते हैं कि जनवरी 2026 तक चांदी ने 30% रिटर्न दिया है. चांदी $93 प्रति औंस तक पहुंच गई है जो पहले कभी सोचा भी नहीं गया था. उच्च मांग और कम उत्पादन ने इसे इस मुकाम तक पहुंचाया है.
चार महीने में निवेश दोगुना, अब नया रिकॉर्ड
पिछले चार महीनों में चांदी ने निवेशकों के पैसे दोगुने कर दिए हैं. MCX पर चांदी का वायदा भाव अक्तूबर 2025 में ₹1,50,000 प्रति किलो पार कर गया था. 29 सितंबर 2025 को स्पॉट मार्केट में भी यही भाव दर्ज हुआ था. अब 19 जनवरी 2026 को चांदी का मार्च वायदा ₹3,01,315 प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया.






