बिना सैलरी स्लिप और गारंटी के मिलेगा लोन, सरकारी स्कीम से मिलेगा आसान लोन Bussiness Loan

Bussiness Loan: देशभर में डिलीवरी एजेंट, घरेलू सहायक और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए एक राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार एक नई माइक्रोक्रेडिट स्कीम शुरू करने की तैयारी में है, जिसके तहत उन्हें ...

Ravi Yadav

Bussiness Loan: देशभर में डिलीवरी एजेंट, घरेलू सहायक और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए एक राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार एक नई माइक्रोक्रेडिट स्कीम शुरू करने की तैयारी में है, जिसके तहत उन्हें बिना किसी गारंटी ₹10,000 तक का लोन मिलेगा. यह योजना उन लोगों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने का प्रयास है, जिनके पास न तो नियमित नौकरी है और न ही कोई क्रेडिट स्कोर.

अप्रैल से शुरू हो सकती है स्कीम, मिल सकता है शुरुआती लोन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह स्कीम अप्रैल 2026 से शुरू हो सकती है. केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने इस योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है. इसका उद्देश्य स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स, घरेलू सहायकों, और दैनिक कामगारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है. योजना के तहत सरकार हर वर्ष पात्र कामगारों को ₹10,000 तक का माइक्रो लोन देगी, जिससे वे बाइक, मोबाइल या काम के अन्य उपकरण खरीद सकें.

पीएम-स्वनिधि स्कीम से मिलेगी प्रेरणा

इस नई माइक्रोक्रेडिट स्कीम का ढांचा PM-SVANidhi (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) स्कीम से प्रेरित होगा. PM-SVANidhi में पहले चरण में ₹10,000 का लोन मिलता है, जिसे समय पर चुकाने पर आगे ₹20,000 और ₹50,000 तक का लोन भी मिल सकता है. डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा, ब्याज पर 7% तक की सब्सिडी, और क्रेडिट स्कोर में सुधार जैसे लाभ इस योजना के तहत दिए जाते हैं. नई गिग वर्कर्स योजना में भी इसी तरह की सुविधाएं लागू किए जाने की संभावना है.

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कौन होंगे पात्र? जानें किसे मिलेगा लाभ

इस योजना का लाभ उन्हीं गिग वर्कर्स और असंगठित कामगारों को मिलेगा जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होंगे. ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत वे कामगार जिनके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), आधार कार्ड और अन्य मान्य दस्तावेज होंगे, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य है कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों की पहचान को पुख्ता किया जाए, जिससे वे सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं के लाभ से वंचित न रह जाएं.

बैंक लोन पाने की सबसे बड़ी बाधा होगी दूर

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि नियमित आय प्रमाण, सैलरी स्लिप या क्रेडिट हिस्ट्री की कमी के कारण उन्हें बैंक लोन मिलना मुश्किल हो जाता है. यह नई स्कीम बिना गारंटी लोन की सुविधा देकर इस समस्या को हल करेगी. सरकार का मानना है कि यदि इन कामगारों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाए, तो वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकते हैं.

31 करोड़ से ज्यादा असंगठित कामगार ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड

नवंबर 2025 तक, ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक रजिस्टर्ड हो चुके हैं. इसमें डिलीवरी वर्कर्स, घरेलू सहायकों, निर्माण मजदूरों, सफाईकर्मियों और अन्य गिग वर्कर्स की बड़ी संख्या शामिल है. इस स्कीम से ये लोग न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, बल्कि उन्हें औपचारिक वित्तीय ढांचे से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा.

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लोन की राशि कैसे होगी उपयोगी?

₹10,000 की लोन राशि गिग वर्कर्स की व्यावहारिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकती है:

  • डिलीवरी वर्कर बाइक की मरम्मत या नया मोबाइल खरीद सकते हैं
  • घरेलू सहायक जरूरी घरेलू उपकरण ले सकते हैं
  • दैनिक मजदूर काम के उपकरण या साइकिल जैसी बुनियादी चीजें खरीद सकते हैं

यह छोटी रकम उन्हें काम के स्तर पर मजबूती और आत्मनिर्भरता देगी

क्या होगा आगे?

सरकार की यह पहल अगर सफल होती है, तो भविष्य में इसमें ब्याज सब्सिडी, क्रेडिट लिंक्ड इंश्योरेंस और बड़ी लोन राशि की सुविधा भी शामिल की जा सकती है. साथ ही यह गिग इकॉनमी में काम करने वालों के लिए एक फाइनेंशियल सुरक्षा कवच का काम करेगी.

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